
रायपुर। राजधानी रायपुर में एक चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। लंबे समय से ड्रग पैडलिंग, सट्टा और अवैध शराब कारोबार में सक्रिय हिस्ट्रीशीटर मुकेश बनिया ने कथित तौर पर अपनी हिसाब-किताब की डायरी तैयार कर रखी थी। इस डायरी में पुलिस अफसरों, साइबर क्राइम टीम के अधिकारियों और पत्रकारों को दिए गए कथित “प्रोटेक्शन मनी” का पूरा विवरण दर्ज है। सूत्रों के अनुसार, डायरी में साल 2025 की तारीखों के अनुसार लिखा गया है कि मुकेश ने हर महीने कितने पैसे किसे दिए। इसके अलावा डायरी के एक पेज पर कितना किलो गांजा किस सप्लायर को दिया गया, इसकी पूरी डिटेल है। तीसरे पेज में कोतवाली थाना पुलिस को दिए गए पेमेंट का हिसाब लिखा गया है।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई और डायरी का खुलासा
राज्य के क्राइम ब्रांच में तैनात नए टीआई को जब मुकेश बनिया के अपराध और इस डायरी की जानकारी मिली, तो उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ कार्रवाई की। सूत्रों के अनुसार, मुकेश को “सियार” बनाकर उल्टा लटकाया गया और पीटा गया, जिसके बाद उसने पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों के नाम लिखी डायरी सौंप दी।

इस डायरी के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चाएँ तेज हो गईं। आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने अपनी पोस्ट में डायरी के पन्नों को शेयर किया। हालांकि, रायपुर पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया कि डायरी में लिखी जानकारी की सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकती। बावजूद इसके, इस मामले ने राजधानी में लंबे समय से चल रहे कथित भ्रष्टाचार और संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लंबे समय से तैनात पुलिसकर्मी और प्रभाव
शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह है कि एक ASI पाठक चाचा पिछले लगभग 25 वर्षों से राजधानी के थानों में तैनात हैं। नियमों के अनुसार किसी भी पुलिसकर्मी को सीमित अवधि के बाद अन्य जिले या क्षेत्र में भेजा जाना चाहिए, लेकिन यह केवल कागजों तक ही सीमित रहा।

समान स्थिति राजधानी के सटे आरंग क्षेत्र में भी देखी गई है, जहां एक नगर सैनिक लंबे समय से एक ही थाने में तैनात है। उसका प्रभाव इतना बढ़ गया कि थाना प्रभारी भी कई मामलों में उसके बिना कार्रवाई करने से हिचकते हैं।
सट्टा, गांजा और अवैध शराब के ठिकाने
शहर के कई थाना क्षेत्रों में यह आम चर्चा है कि सट्टा, गांजा और अवैध शराब के ठिकानों की जानकारी पुलिस के पास है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। सूत्रों के अनुसार, कुछ पुलिसकर्मी हर महीने मोटी रकम वसूलते हैं और बदले में अपराधियों को संरक्षण प्रदान करते हैं। यही कारण है कि अपराधी बेखौफ होकर अपने धंधे चला रहे हैं।

आरंग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नगर सैनिकों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ नगर सैनिक लंबे समय से एक ही थाने में तैनात हैं और उनका प्रभाव इतना बढ़ गया कि सुपरवाइजिंग अधिकारियों की कार्रवाई में भी देरी होती है। आरोप है कि उनकी शह पर नशा, अवैध शराब, जुआ-सट्टा और रेत उत्खनन फल-फूल रहे हैं।
डायरी की पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, मुकेश बनिया ने यह डायरी अपने अवैध व्यापारों की निगरानी के लिए तैयार की थी। इसमें शामिल है:

- पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों को दिए गए प्रोटेक्शन मनी का विवरण
- विभिन्न सप्लायरों को वितरित गांजा की मात्रा
- कोतवाली थाना द्वारा किए गए पेमेंट का हिसाब
- सट्टा और जुए से अर्जित मासिक आमदनी का लेखा-जोखा
- यह भी कि किस दिन कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी पैसे प्राप्त करते थे
पुलिस और प्रशासन ने डायरी की सत्यता की पुष्टि से इंकार किया है।
सोशल मीडिया में वायरल
डायरी आज सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। कई नागरिक और एक्टिविस्टों ने इसे शेयर किया और सवाल उठाए कि राजधानी में लंबे समय से किस प्रकार से अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों में पुलिस की मिलीभगत चल रही है। वायरल डायरी ने रायपुर के थानों में लंबे समय से चल रहे अवैध धंधे और संरक्षण व्यवस्था की पोल खोल दी।
प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया
शहर के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले पर गहन जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच इस बात की पुष्टि करेगी कि डायरी में लिखी जानकारी वास्तविक है या नहीं और किन अधिकारियों का नाम इस कारोबार से जुड़ा है। पुलिस ने साफ किया है कि कानूनी कार्रवाई के लिए सत्यापित प्रमाण आवश्यक हैं। इस बीच रायपुर की जनता और नागरिक समाज ने भी मांग की है कि अपराधियों और उनके संरक्षण में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।




