
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आवारा मवेशियों की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। इनसे होने वाले ट्रैफिक जाम, सड़क दुर्घटनाओं और सार्वजनिक स्थानों की गंदगी जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए रायपुर नगर पालिक निगम द्वारा एक विशेष ‘आवारा पशु पकड़ो अभियान’ चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य शहर को आवारा मवेशियों से मुक्त करना है और सड़कों पर शांति, स्वच्छता और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करना है।
नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गुरुवार को शहर के विभिन्न जोनों में अभियान चलाकर कुल 22 आवारा पशुओं को पकड़ा गया। इन मवेशियों को निगम की काऊकैचर टीम द्वारा पकड़ा गया और गोकुल नगर सहित विभिन्न गौठानों में भेजा गया। कार्रवाई महापौर मीनल चौबे, स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष गायत्री सुनील चंद्राकर और निगम आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर की जा रही है।
जोनवार कार्रवाई की स्थिति
- जोन 1: मौल श्री विहार मार्ग से 1 मवेशी को पकड़ा गया।
- जोन 3: डुमरतराई मुख्य मार्ग से 4 आवारा पशु पकड़े गए।
- जोन 4: महिला थाना (वार्ड 57), शहीद भगत सिंह चौक (वार्ड 34), पुलिस लाइन रोड (वार्ड 46) से 1-1 मवेशियों की धरपकड़।
- जोन 6: भाठागांव के नए मार्ग से सबसे अधिक 13 मवेशियों को कब्जे में लिया गया।
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान प्रतिदिन जारी रहेगा और यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा अपने मवेशी को खुले में छोड़ा जाता है तो उस पर जुर्माना और पशु जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम प्रशासन ने यह भी कहा कि शहर की सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात को बनाए रखने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।
धरातल पर दिखाई दे रही हकीकत
हालांकि निगम की यह कार्रवाई रिपोर्टों और प्रेस विज्ञप्तियों में प्रभावशाली दिखती है, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। शहर के प्रमुख स्थानों जैसे तेलीबांधा चौक, फाफाडीह, मंदिर हसौद रोड, देवेंद्र नगर, भनपुरी और टिकरापारा जैसे इलाकों में अभी भी बड़ी संख्या में आवारा मवेशी खुले में घूमते देखे जा सकते हैं। कई स्थानों पर वे सड़कों के बीचोंबीच बैठ जाते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और कभी-कभी दुर्घटनाएं भी घटित होती हैं।
स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया
फाफाडीह क्षेत्र के निवासी रवि ठाकुर ने बताया, “पिछले सप्ताह एक बाइक सवार युवक की टक्कर एक आवारा सांड से हो गई थी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। निगम की टीमें सिर्फ कुछ क्षेत्रों में दिखती हैं। बाकी इलाकों में यह अभियान कागजों में ही सीमित है।”
इसी तरह मंदिर हसौद क्षेत्र की महिला निवासी अंजलि वर्मा कहती हैं, “रात के समय सबसे ज्यादा खतरा होता है, क्योंकि अंधेरे में मवेशी अचानक सामने आ जाते हैं और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन जाते हैं। कई बार इनसे टकराकर लोग गिर जाते हैं और गंभीर चोटें आ जाती हैं।”
अभियान की सीमाएँ
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अभियान व्यापक रूप से सफल तभी हो सकता है जब यह सतत, पूरे शहर में और प्रभावी निगरानी के साथ चलाया जाए। अभी यह केवल कुछ खास इलाकों तक सीमित दिखता है। रात के समय गश्त, ट्रैफिक सेंसिटिव इलाकों की विशेष निगरानी और आम नागरिकों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
निगम का कहना है कि वे नागरिकों को लगातार जागरूक कर रहे हैं कि वे अपने मवेशियों को खुले में न छोड़ें। मगर कुछ पशु मालिक जानबूझकर यह गलती दोहराते हैं और नियमों की अनदेखी करते हैं।




