
Raipur. रायपुर। 1092 दिन तक सीसी टीवी फुटेज देखने, फुटेज का विधिवत पंचनामा करने, 7 प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और आरोपियों के बयान लेने पर अपराध होना, देखना या करना स्वीकार करने और थाना प्रभारी ,जांच अधिकारी, सीएसपी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदि सबके द्वारा गहन जांच करने के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज किया और फिर दबाव पड़ने पर पलटी मारते हुए अपराध दर्ज करने के मात्र 11 दिन बाद कह दिया कि-‘घटना ही नहीं हुई!
कोयला घोटाले के आरोपी निखिल चंद्राकर की पहुंच के आगे नतमस्तक पुलिस?
निखिल चंद्राकर पर मेहरबान क्यों हुई पुलिस?
अपराध दर्ज होते ही मची खलीबली.. पुलिस ने मारी पलटी, कह दिया अपराध ही नहीं हुआ। निखिल चंद्राकर और उसकी अपराधी पत्नी तलविंदर को EOW के अधिकारियों के संरक्षण का एंगल सामने आया। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून के राज, पुलिस की निष्पक्षता और महिला सुरक्षा पर एक साथ गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं। मामला 11 नवंबर 2022 का है, जब एक पीड़िता के अनुसार कोयला घोटाले के केंद्रबिंदु आरोपी निखिल चंद्राकर की पत्नी तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की चंद्राकर ने अपनी बेटी इशिता चंद्राकर उर्फ हनी चंद्राकर एवं सहयोगियों के साथ मिलकर आपराधिक कब्जा, तोड़फोड़ और चोरी की वारदात को अंजाम दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना स्पष्ट सीसीटीवी फुटेज में कैद थी और थाना खम्हारडीह, रायपुर के पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई, इसके बावजूद तीन साल तक पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया।
कटर मशीन, तोड़फोड़ और ₹40,000 की चोरी
शाम करीब 6:30 बजे, तलविंदर चंद्राकर अपनी बेटी इशिता चंद्राकर उर्फ हनी चंद्राकर, स्पर्श गुप्ता (सुपुत्र राजीव गुप्ता जो की होटल कोर्टयार्ड मैरियट का मैनेजर है कृषक कॉलोनी जोरा निवासी) और एक ताला तोड़ने वाले कारपेंटर को लेकर सोसाइटी पहुंची। उनकी सहयोगी उम्मीदा बानो एवं अंजू आदित्य मोदी वहां उपस्थित थे। कारपेंटर से ताला कटवाया गया, तत्पश्चात नया ताला लगाकर चाबी स्वयं रख ली, फिर बलपूर्वक घर में प्रवेश कर तोड़फोड़, घर के बाहर लगे झालर लाइट व गमलों को नुकसान, और ₹40,000 नकद व दस्तावेज डकैती किए गए।
सीसीटीवी सबूत मिटाने की कोशिश
पीड़िता द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरों में घटना पूरी तरह रिकॉर्ड है। फुटेज में कैमरे का तार तोड़ने की कोशिश भी दिखाई देती है ताकि वारदात रिकॉर्ड न हो सके।
पुलिस मौके पर, कार्रवाई नदारद
घटना के समय थाना खम्हारडीह के दो आरक्षक मोती साहू और अखिलेश साहू मौके पर मौजूद थे। पर वे अपराधियों के सामने मूक दर्शक बने रहे जो कि सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है।
थाने में शिकायत, नाम पढ़ते ही बर्ताव बदला
पीड़िता जब शिकायत लेकर थाने पहुंची, तो आरोप है कि जैसे ही तत्कालीन थाना प्रभारी विजय यादव ने निखिल चंद्राकर का नाम पढ़ा, उन्होंने शिकायत पत्र फेंक दिया और अपमानजनक भाषा में पीड़िता को थाने से बाहर निकाल दिया। तब पीड़िता ने तत्कालीन SSP प्रशांत अग्रवाल जिनके ऊपर निखिल चंद्राकर को खुला संरक्षण देने का आरोप है, को भी शिकायत व्हाट्सएप मैसेज के जरिए भेजी, लेकिन एस एस पी प्रशांत अग्रवाल द्वारा पीड़िता को व्हाट्सएप में ही ब्लॉक कर दिया गया।
अनशन भी बेअसर, फिर अदालत का रास्ता
न्याय न मिलने पर पीड़िता ने थाने के बाहर शांतिपूर्ण आमरण अनशन किया। लेकिन रायपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों जिनमें केसरी नंदन नगर पुलिस अधीक्षक भी थे,ने fir करने का झूठे आश्वासन देकर अनशन तुड़वाया, मगर कार्रवाई फिर भी नहीं हुई। अंततः पीड़िता ने दंप्रसं 156(3) के तहत न्यायालय की शरण ली।
1092 दिन की गहन जांच के बाद FIR — CCTV देखकर कायम हुआ अपराध
DGP मुख्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार करीब 1092 दिन तक थाना प्रभारी ,जांच अधिकारी, तीन नगर पुलिस अधीक्षक जांच की गई, IUCAW की डीएसपी ललिता मेहर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर लखन पटले से लेकर नीचे के हर अधिकारी द्वारा जांच, 7 प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान लिये गये, सीसीटीवी फुटेज का गहन परीक्षण और पंचनामा हुआ और सबकुछ पुष्ट और अकाट्य पाए जाने के बाद, 7 नवंबर 2025 को पुलिस ने मामला दर्ज किया। FIR दर्ज करने से पहले पुलिस अधिकारियों ने पूरा सीसीटीवी फुटेज देखा, इसका पंचनामा किया, गवाहों और आरोपियों के बयान लिए और इन्हें अकाट्य पाए जाने के आधार पर अपराध क्रमांक 310/25 कायम किया गया। यानी,कई कई पुलिस अधिकारियों ने स्वयं गहन जांचकर अपराध होना पाया और तब अपराध क्रमांक 310/25 दर्ज किया। इस मामलें के सभी वैधानिक दस्तावेज जनता से रिश्ता के पास मौजूद है।
11 दिन बाद ही पलटी पुलिस, पेश की खारिजी रिपोर्ट
लेकिन पीड़िता तब भौचक्की रह गई जब निखिल चंद्राकर और तलविंदर चंद्राकर का थाने में थानेदार वासुदेव परघनिया से घंटों मीटिंग चलता और थाना प्रभारी निखिल चंद्राकर को स्वयं कार तक बिदाई देने आते और पीड़िता का बयान दर्ज करने से साफ़ मना करते हुए अपराध क्रमांक 310/25 दर्ज करने के सिर्फ 11 दिन बाद, थाना प्रभारी द्वारा सीजेएम न्यायालय में अतिगोपनीय ढंग से चुपचाप छुपकर बिना निर्धारित चैनल और प्रक्रिया में निर्धारित अधिकारियों की मंजूरी अंकित करवाए बिना ही खारिजी रिपोर्ट सी जे एम कोर्ट में पेश कर दी गई, जिसमें यह लिख दिया गया कि “घटना होना नहीं पाया गया”। साथ ही थानेदार वासुदेव परघनिया पीड़िता को निखिल चंद्राकर से समझौता करने का दबाव और निखिल चंद्राकर और उसके साथियों द्वारा खुली धमकी दी हमारी पुलिस से सेटिंग हो गई है केस ख़ारिज भी करवाएँगे और तुझे फ़सा भी देंगे।
अब सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है—
- जो पुलिस अपराध दर्ज करने से पहले 1092 दिन तक गहन जांचकर स्वयं सीसीटीवी देखकर संतुष्ट हुई,फुटेज का विधिवत पंचनामा किया,7 गवाहों और आरोपियों के बयान लिए जिसमें ये सभी गवाह और आरोपी घटना होना या किया जाना स्वीकार कर रहे है और तब जाकर पुलिस ने अपराध क्रमांक 310/25 दर्ज किया और फिर वही पुलिस सिर्फ 11 दिन बाद उसी घटना को कैसे नकार सकती है?
इस पूरे घटनाक्रम ने कई और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
- क्या न्यायालय का समय खराब करने के लिए औपचारिक रूप से FIR दर्ज की गई थी?
- या फिर कोयला घोटाले के आरोपी निखिल चंद्राकर की राजनीतिक पहुंच और EOW और पुलिस में भारी अवैध दखल ने पुलिस पर इतना दबाव बनाया कि वह दंडवत होकर खारिजी रिपोर्ट लेकर अदालत पहुंच गई?
खारिजी रिपोर्ट में:
- स्पष्ट सीसीटीवी फुटेज को दरकिनार किया गया।
- इशिता चंद्राकर को नाबालिग बताकर जिम्मेदारी से बाहर किया गया।
- थाना खामहार्डिह की ओर से न्यायालय में ज्ञापन पेश किया गया जिसमें उक्त अपराध घटित नहीं होने पाए जाने पर खारिजी चाक करते हुए सीजेएम न्यायालय में खारीजी पेश किया गया।
- जबकि वही सीसीटीवी फुटेज पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में अपराध को दिखाता है।
11 दिन बाद ही पलटी पुलिस, पेश की खारिजी रिपोर्ट
EOW और पुलिस के भीतर के अतिविश्वस्त सूत्रों के अनुसार बताया जाता है कि मुख्य अपराधी तलविंदर चंद्राकर का पति जो कि छत्तीसगढ़ के कुख्यात कोयला स्कैम का केंद्रीय अपराधी है जो कि अब EOW और पुलिस से सांठगांठ करके उनको कोयला स्कैम के आरोपियों के भीतरी राज उगलकर और बचे हुए राज उगलने का आश्वासन देकर बदले में कोयला स्कैम, शराब घोटाला और DMF घोटाले से अर्जित की गई 50 करोड़ से अधिक रकम की अवैध कमाई गई से खरीदी प्रॉपर्टी को छोड़े जाने और अपनी अपराधी पत्नी तलविंदर चंद्राकर,अपराधी बेटी इशिता चंद्राकर के विरुद्ध चल रहे सभी गंभीर आपराधिक प्रकरणों को किसी भी तरीके से समाप्त करवाए जाने का आश्वासन ले चुका है और इसलिए गहन जांच के बाद दर्ज अपराध क्रमांक 310/25 का EOW के अधिकारियों के दबाव में आनन फानन में पुलिस द्वारा ख़रीजी पेश किया जा रहा है।
अदालत ने पुलिस को भी बनाया पक्षकार
विचारण न्यायालय ने इस मामले में अपराधियों और पुलिस की सांठगांठ के प्रबल संकेतों को देखते हुए स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अब पुलिस को भी पक्षकार बनाया है और थाना प्रभारी खम्हार्डिह को जानकारी सहित अदालत में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
- क्या कोयला घोटाले का आरोपी कानून और पुलिस से ऊपर है?
- क्या सीसीटीवी देखकर FIR दर्ज कर, फिर उसी घटना से इनकार पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं है?
- क्या यह न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास है?
- क्या राजधानी रायपुर में महिलाएं सुरक्षित हैं?
- क्या छत्तीसगढ़ की साय सरकार महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था में विफल साबित हो रही है?
- क्या गृह मंत्री अपने विभाग,अपराधियों और अधिकारियों को नियंत्रित करने में स्पष्ट रूप से असफल नहीं रहे हैं?
यह मामला अब केवल एक पीड़िता का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था, पुलिस की निष्पक्षता, सत्ता-प्रशासन की क्षमता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।




