
पखांजूर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पखांजूर स्थित नर–नारायण सेवा आश्रम में आयोजित 62वें मकर संक्रांति गंगा स्नान योग महामेला में विशेष रूप से सहभागिता की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजा-अर्चना की और पूज्य स्वामी सत्यानंद परमहंस जी को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
स्वामी सत्यानंद परमहंस जी का जीवन आस्था, सेवा और त्याग का अनुपम उदाहरण रहा है। उन्होंने ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के मंत्र को अपने कर्मों से समाज में जीवंत किया और आम लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बने। उनके उपदेशों और शिक्षाओं का प्रभाव आज भी समाज के विभिन्न वर्गों में देखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि स्वामी सत्यानंद परमहंस जी के आदर्शों और उनके जीवन के मार्गदर्शन से प्रेरणा लेकर हमारी सरकार छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं को गति देने के लिए प्रशासन सतत प्रयासरत है।
इस महामेला में भारी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लिया। मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थित लोगों से कहा कि मकर संक्रांति का पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह मानव जीवन में सदाचार, सेवा और संयम के महत्व को भी दर्शाता है।
उन्होंने आश्रम में आयोजित गंगा स्नान योग सत्र में भी भाग लिया और उपस्थित श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ के लिए योग साधना में शामिल होने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री का मानना है कि योग, आध्यात्म और सेवा भाव को जीवन में अपनाने से न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि समाज में समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
इस अवसर पर जिला प्रशासन और आश्रम प्रबंधन ने पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उपस्थित लोगों के साथ मिलकर कार्यक्रम का सफल संचालन सुनिश्चित किया और सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाला भी साबित हुआ। मुख्यमंत्री की सहभागिता ने इस महामेला को और भी भव्य और प्रेरणादायक बना दिया।




