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शादी का झांसा देकर किया बलात्कार फिर मेडिकल दस्तावेज की चोरी करवाने वाले आरोपी निखिल चंद्राकर की जमानत ख़ारिज

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के भीतर एक महिला के संघर्ष, बलात्कार, दस्तावेजों की साजिशन चोरी, जानलेवा हमले और पुलिस तंत्र की चुप्पी ने राज्य की कानून व्यवस्था की सड़ांध को उजागर कर दिया है। इस पूरे प्रकरण का मुख्य किरदार- कुख्यात अपराधी निखिल चंद्राकर, जो कोयला तस्करी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा नामजद है, और बलात्कार, घर में घुसपैठ, लूट, दस्तावेज़ नष्ट करने, और हत्या की कोशिश के संगीन आरोपों में भी घिर चुका है। इस आरोपी की जमानत याचिका शुक्रवार को रायपुर न्यायालय द्वारा सख्ती से खारिज कर दी गई, जब यह स्पष्ट हुआ कि निखिल ने बलात्कार से संबंधित मेडिकल और कानूनी दस्तावेजों की चोरी साजिशपूर्वक करवाई थी।


जमानत याचिका न्यायालय द्वारा सख्ती से खारिज
बुधवार को निखिल चंद्राकर ने बलात्कार के साक्ष्य मिटाने के मामले में जमानत याचिका दाखिल की थी। जिसमें शुक्रवार को सुनवाई हुई माननीय न्यायालय ने यह मानते हुए कि आरोपी संगठित साजिश में शामिल था, उसकी जमानत याचिका को सख्ती से खारिज कर दिया।

बलात्कार की शिकायत पर थाना प्रभारी विजय यादव ने पीड़िता को थाने से भगा दिया, शिकायत पत्र फेंका


पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब एक युवती ने कुख्यात अपराधी निखिल चंद्राकर द्वारा शादी का झांसा देकर बलात्कार किए जाने की शिकायत लेकर थाना खम्हारडीह के थाना प्रभारी विजय यादव के पास पहुंची। लेकिन इस सिस्टम से न्याय की उम्मीद लगाए इस महिला को धक्के और अपमान के सिवा कुछ नहीं मिला। शिकायत पढ़ते ही जैसे ही थाना प्रभारी को निखिल चंद्राकर का नाम दिखा, उन्होंने पीड़िता को थाने से बाहर निकालने का आदेश देते हुए शिकायत पत्र को पीड़िता के चेहरे पर फेंक दिया।

तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने भी किया आरोपी का संरक्षण


अपमानित पीड़िता ने जब रायपुर के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल से गुहार लगाई, तब उनसे भी कोई न्याय नहीं मिला कोई FIR दर्ज नहीं की गई।

राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्राचार — आयोग की सदस्य के हस्तक्षेप पर 193 दिन बाद दर्ज हुआ अपराध


निरंतर अनदेखी और उत्पीड़न के बाद, पीड़िता ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, और राष्ट्रीय महिला आयोग को पूरे घटनाक्रम की जानकारी पत्राचार द्वारा दी। 191 दिन बाद, राष्ट्रीय महिला आयोग की एक सदस्य दिल्ली से रायपुर आईं और तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल, IUCAW की तत्कालीन महिला डीएसपी ललिता मेहर(ने अपराधियों को बचाने सबूत को गायब करने कूटरचित दस्तावेज बनाने में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल के साथ मिलकर अपराधियों को बचाने में नेतृत्व भी संभाला,दुखद ये है कि महिला अधिकारी होकर महिला के ही शोषण करने में मुख्य किरदार निभाया), और तत्कालीन थाना प्रभारी विजय यादव को तलब कर कड़ी फटकार लगाई. “बलात्कार जैसे गंभीर अपराध में भी आप आरोपी का संरक्षण क्यों कर रहे हैं? क्यों नहीं कार्यवाही की गई?” ठीक 193 दिन बाद, राष्ट्रीय महिला आयोग के भारी दबाव के चलते अपराध पंजीबद्ध किया गया, लेकिन तब तक न केवल सबूत नष्ट किए जा चुके थे, बल्कि पीड़िता पर हमले भी हो चुके थे।

घर में ताला तोड़कर अवैध कब्जा, तोड़फोड़ और लूट- आरोपी की पत्नी तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की और गुर्गों की भूमिका उजागर


पुलिस की निष्क्रियता से उत्साहित कुख्यात अपराधी निखिल चंद्राकर ने अपनी अपराधी पत्नी तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की को निर्देश देकर पीड़िता के घर में कारपेंटर से ताला तुड़वाकर अवैध रूप से घुसपैठ की, लूटपाट की, और घर में दूसरा ताला लगाकर घर कब्जा कर लिया। इस घटना के वक्त पीड़िता घर पर नहीं थी। जब वह लौटी और शिकायत एवं सीसीटीवी का स्पष्ट वीडियो फुटेज लेकर पुनः थाना प्रभारी विजय यादव के पास पहुंची, तो उन्होंने शिकायत पत्र को फाड़ कर वापस पीड़िता के चेहरे पर फेंक दिया।

तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को व्हाट्सएप पर भेजा गया शिकायत पत्र — फिर भी मौन


थाने से न्याय न मिलने पर पीड़िता ने तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल को व्हाट्सएप चैट के माध्यम से पत्र भेजा और मदद की गुहार लगाई कि कुख्यात अपराधी निखिल चंद्राकर के निर्देश पर उसकी पत्नी तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की, इशिता चंद्राकर उर्फ हनी एवं स्पर्श गुप्ता ने घर पर कब्जा कर लिया है। लेकिन SSP ने सिर्फ मैसेज देखा और मौन साधे रहे। आज दिनांक तक इस अवैध कब्जे पर कोई कार्यवाही नहीं की गई थाना खम्हारडीह द्वारा। मामले में अप्रैल 2024 को गृह मंत्री विजय शर्मा के कार्यालय से स्पष्ट लिखित आदेश भी जारी किया गया था कि पीड़िता के सभी मामलों में अपराध दर्ज करने को लेकर बावजूद मामले में अपराध दर्ज नहीं किया गया एवं गृहमंत्री के आदेश की धज्जियां उड़ाई गई।

बलात्कार के साक्ष्य चोरी — पीड़िता के घर में घुसकर मेडिकल रिपोर्ट और शैक्षणिक दस्तावेज चोरी कराए गए


कुख्यात अपराधी निखिल चंद्राकर एवं उसकी पत्नी तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की के निर्देश पर अपनी साजिश को आगे बढ़ाते हुए डुप्लीकेट चाबी के ज़रिए पीड़िता के घर में अपने गुर्गों निलेश सरवैया और गणेश वर्मा उर्फ गोलू को भेजा। उन्होंने पीड़िता के बलात्कार से संबंधित मेडिकल दस्तावेज, शैक्षिक प्रमाण पत्र, और अन्य प्रमाणिक दस्तावेज चोरी करवा लिए। इस अपराध को पुलिस ने पूरा 722 दिन बाद दर्ज किया और सिर्फ तीन आरोपियों के नामजद अपराध दर्ज किया — निखिल चंद्राकर, निलेश सरवैया और गणेश वर्मा उर्फ गोलू।

हत्या का षड्यंत्र — घर में घुसकर 40 लोगों ने किया जानलेवा हमला, पुलिस बनी रही मूकदर्शक


12 नवंबर की रात, कुख्यात अपराधी निखिल चंद्राकर और उसका पूरा गिरोह — अपराधी पत्नी तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की, इशिता चंद्राकर उर्फ हनी, राजीव गुप्ता (कोर्टयार्ड मैरियट होटल का कर्मचारी, जोकि कोल घोटाले से कमाए हुए कुख्यात अपराधी निखिल चंद्राकर के काले धन को सफेद करने का सहयोगी है), उसकी पत्नी निधि गुप्ता, बेटा स्पर्श गुप्ता, और साले सोनू गरचा, मोनू गरचा, रवनीत कौर एवं अन्य— सबने मिलकर पीड़िता की हत्या का षड्यंत्र रचा गया।
सीसीटीवी कैमरों में दिखा कि सभी दीवार फांद कर घर में दाखिल हो रहे हैं। जब पीड़िता ने दरवाजा बंद कर लिया, तब दरवाजे को तोड़कर अंदर घुसकर लोहे की रॉड और लकड़ी की स्टिक से जानलेवा हमला किया गया।

112 कॉल पर पहुंची पुलिस ने भी पीड़िता को बिना सुरक्षा के छोड़ दिया


परिजनों द्वारा 112 में कॉल कर पुलिस को बुलाया गया, लेकिन थाना तेलीबांधा की पेट्रोलिंग टीम जानबूझकर देर से पहुंची। जब आई भी, तो पीड़िता को अपराधियों से बचाने की जगह मार खाने दिया कोई बीच बचाव नहीं किया गया,और फिर पुलिस ने पीड़िता को बिना सुपुर्दी के ही भेज दिया। फिर देर रात 3:00 बजे अपराधियों को सहयोग करने पीड़िता के विरुद्ध फेना काटकर दे दिया गया विवेचक फत्तू लाल ठाकुर द्वारा।

फिर पुलिस ने मामूली धाराओं में अपराध दर्ज कर आरोपी को बचाया


जब पीड़िता अगले दिन थाना तेलीबांधा पहुंची तो ए एस आई विवेचन फत्तू लाल ठाकुर ने शिकायत पर गंभीर धाराओं की बजाय हल्की धाराएं लगाई, और पीड़िता से जबरन FIR पर हस्ताक्षर करवा लिया।

कुख्यात अपराधी निखिल चंद्राकर की पत्नी और साले सोनू गरचा द्वारा जान से मारने की धमकी


इसके बाद तलविंदर चंद्राकर और सोनू गरचा ने फोन कर धमकी दी। “तू जानती नहीं हम कौन हैं, सीएम के लोग हैं। तुझे जान से मार देंगे अभी तो तू सिर्फ ट्रेलर अच्छी है। शहर छोड़ दे। तेरा वो हश्र करेंगे कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेगी कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता”कहकर धमकी दी गई। जिसकी स्पष्ट वॉइस रिकॉर्डिंग के साथ शिकायत पत्र पीड़िता द्वारा थाना खम्हारडीह में दी गई लेकिन उसे घटना को ढाई वर्ष हो गए आज दिनांक तक उसे मामले में किसी प्रकार का कोई अपराध दर्ज नहीं किया गया सिर्फ अपराधियों का मनोबल बढ़ाया गया पुलिस द्वारा।

तत्कालीन थाना प्रभारी श्रुति सिंह ने तो बैकडेट में शिकायत पत्र बनवाकर पीड़िता को फंसाने की योजना बनाई


तत्कालीन थाना प्रभारी श्रुति सिंह द्वारा आरोपियों से मिलीभगत कर पीड़िता के नाम से बैकडेट में फर्जी शिकायत पत्र तैयार कर, उसे ही आरोपी बनाने की तैयारी कर मानसिक प्रताड़ना की जाती थी। जब पीड़िता ने इसकी शिकायत की, तब एक साल बाद तत्कालीन थाना प्रभारी श्रुति सिंह पर विभागीय जांच बैठी, तब जाकर अत्याचार रुका। लेकिन विभागीय जांच अधूरी होने पर भी तत्कालीन थाना प्रभारी श्रुति सिंह को पदोन्नत कर डीएसपी का पदभार मिल गया।

मुख्तार खान एवं तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की द्वारा सीसीटीवी से निगरानी, अश्लीलता और जानलेवा हमला


कोल घोटाले एवं बलात्कार मामले का आरोपी निखिल चंद्राकर का करीबी मुख्तार खान, अपराधी निखिल चंद्राकर एवं उसकी पत्नी अपराधी तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की के निर्देश पर पीड़िता के घर के बाहर सीसीटीवी लगाकर निजता का हनन करता है, अर्धनग्न होकर घूरता, लिफ्ट में अश्लील हरकतें करता और गाड़ी से टक्कर मारने का प्रयास करता पीड़िता के घर में लगे एक के कंप्रेसर में लोहे की गार्ड से उसे क्षतिग्रस्त कर कॉपर पाइप को काट दिया एवं पीड़िता की कैमरे के माध्यम से फोटो खींचकर वायरल करता। पीड़िता द्वारा कई बार शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई अपराध दर्ज नहीं किया।

गृहमंत्री विजय शर्मा के आदेश की भी अनदेखी — पुलिस तंत्र पर गंभीर सवाल


छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने अप्रैल 2024 में स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि पीड़िता के साथ हुए सभी मामलों में तत्काल अपराध दर्ज किए जाएं, लेकिन राजधानी की पुलिस ने आज तक उन आदेशों की भी धज्जियाँ उड़ाईं।
अब सवाल सीधा है — क्या छत्तीसगढ़ की राजधानी में पीड़िताओं को न्याय मिलेगा या अपराधियों का ही शासन चलेगा?
क्या विष्णुदेव साय की सुशासन सरकार में न्याय केवल रसूखदारों के लिए है?
क्या एक महिला को बार-बार अपमान, उत्पीड़न और हत्या की कोशिशों के बावजूद कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी?
क्या रायपुर पुलिस सिर्फ अपराधियों की रखैल बनकर रह गई है?
यह सिर्फ एक पीड़िता की नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ की व्यवस्था पर कड़ा प्रश्नचिह्न है।

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