छत्तीसगढ़

वार्ड 7 दलदल सिवनी में महावीर क्रीड़ा समिति की वार्षिक उत्सव

रायपुर। राजधानी रायपुर के वार्ड क्रमांक 7 दलदल सिवनी में महावीर क्रीड़ा समिति द्वारा आयोजित वार्षिक उत्सव ने खेल और संस्कृति दोनों का जीवंत मिश्रण प्रस्तुत किया। चार दिवसीय इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण कबड्डी प्रीमियर लीग रहा, जिसमें रायपुर संभाग के पांच जिलों से चयनित 120 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।

रविवार को पूरे दिन स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। शाम 6:00 बजे से कबड्डी प्रतियोगिताएं शुरू हुईं, जिसमें बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दीं। कार्यक्रम में विधायक अनुज शर्मा, महापौर मीनल चौबे और ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समिति के अध्यक्ष विजय पटेल ने बताया कि यह परंपरा आजादी के बाद ग्रामीण युवाओं को खेलों से जोड़ने के उद्देश्य से 1949 में शुरू की गई थी।

शुरुआती वर्षों में आयोजन केवल कबड्डी प्रतियोगिता तक सीमित था, लेकिन समय के साथ यह क्षेत्र की पहचान बन गई। इस आयोजन से कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे, जबकि कुछ को खेल के आधार पर सरकारी और निजी नौकरी भी मिली। 1985 से 1990 के बीच कबड्डी के साथ लड़ाई मेला भी जुड़ा, जिसके बाद आयोजन का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता गया। वर्तमान में यह कार्यक्रम वर्षो से 25, 26 और 27 जनवरी को तीन दिवसीय आयोजन के रूप में सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

26 जनवरी को कबड्डी का फाइनल मुकाबला हरिणी लायंस महासमुंद और बालाजी टीम के बीच हुआ, जिसमें बालाजी ने फाइनल जीत हासिल की। 27 जनवरी को क्षेत्रीय परंपरा से जुड़े लड़ाई मेला का आयोजन हुआ। मेले में दिनभर पारंपरिक गतिविधियाँ और उत्सव की झलक देखने को मिली। शाम को छत्तीसगढ़ी लोक कला मंच रंग सरोवर द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं, जिसमें कलाकार भूपेंद्र साहू और उनकी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया।

वार्ड पार्षद खेम सेन ने बताया कि महावीर क्रीड़ा एवं संस्कृति समिति के तत्वावधान में यह आयोजन बहुत ही सुंदर ढंग से संपन्न हुआ। ग्रामीणों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। उन्होंने बताया कि यह परंपरा आजादी के बाद से लगातार जारी है और पारंपरिक तरीके से इसे आज तक बनाए रखा गया है।

इस आयोजन का उद्देश्य न केवल खेल को बढ़ावा देना है, बल्कि छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को भी जीवित रखना है। ग्रामीण, खिलाड़ी और कलाकार मिलकर इस उत्सव को सफल बनाने में अपना योगदान देते हैं। आयोजन में शामिल लोगों ने कहा कि कबड्डी प्रतियोगिता और परंपरागत मेले ने क्षेत्रीय युवाओं को एक मंच प्रदान किया है, जिससे खेल, संस्कृति और सामाजिक एकता को बढ़ावा मिला है।

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