
रायपुर। राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ब्रिज के नीचे स्थित मेडलाइफ अस्पताल को लेकर एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से एक बस में भरकर लगभग 30 से 35 मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के लिए रायपुर लाया गया था। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को कथित तौर पर वहीं रोककर रखा गया, जिससे पूरे मामले को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूचना देने वाले व्यक्ति के मुताबिक बस से लाए गए सभी मरीज गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं, जिन्हें आयुष्मान कार्ड के जरिए मुफ्त इलाज का भरोसा दिलाया गया था। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई और अस्पताल में उन्हें लंबे समय तक रोके रखा गया, न तो स्पष्ट इलाज शुरू किया गया और न ही उन्हें कहीं और जाने की अनुमति दी गई।
बताया जा रहा है कि कुछ मरीजों की हालत सामान्य थी, फिर भी उन्हें अस्पताल परिसर में ही रखा गया। इस दौरान परिजनों में डर और असमंजस की स्थिति बनी रही। जैसे ही मामले की जानकारी स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को लगी, उन्होंने तुरंत इसकी सूचना प्रशासन और पुलिस को दी।
तेलीबांधा थाना पुलिस को जैसे ही सूचना मिली, मौके पर पहुंचकर प्रारंभिक पूछताछ शुरू की गई। पुलिस मरीजों की संख्या, उनकी स्थिति और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की जांच कर रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग को भी इस पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया गया है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मरीजों को क्यों रोका गया था और क्या आयुष्मान योजना के तहत किसी तरह की अनियमितता या फर्जीवाड़ा किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। यदि अस्पताल प्रबंधन की ओर से किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।यह मामला न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आयुष्मान योजना के दुरुपयोग की आशंका को भी उजागर करता है।




