
जांजगीर-चांपा। जैजैपुर के वर्तमान विधायक और समिति प्रबंधक बालेश्वर साहू को जिला न्यायालय के आदेश के बाद गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी धोखाधड़ी और गबन के मामले में की गई है। पुलिस ने विधायक को आज अदालत में पेश किया और दो संदूक चालान पेश करने के बाद गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई।
मामला और आरोप
बालेश्वर साहू पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठा लगाकर पौने 43 लाख रुपए का गबन किया। पुलिस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज की है। इसके तहत आरोपी ने मौजूदा समिति प्रबंधक के रूप में पद का दुरुपयोग किया और गैरकानूनी तरीके से निधि का हेरफेर किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, विधायक के खिलाफ लगातार शिकायतें और दबाव बन रहे थे। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लगातार गिरफ्तारी की मांग की। इसके बावजूद विधायक घटना के तुरंत बाद अंडरग्राउंड हो गए।
गिरफ्तारी प्रक्रिया
पुलिस ने विधायक बालेश्वर साहू के ठिकानों पर लगातार दबिश दी। हालांकि उनका पता नहीं चल सका था, लेकिन अदालत के आदेश और जांच के बाद उन्हें आज गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट में पेश करने के बाद दो संदूक चालान भी पेश किए गए। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अनुसार, यह कार्रवाई एफआईआर और शिकायत के आधार पर की गई। बालेश्वर साहू के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने एसपी ऑफिस का घेराव और आंदोलन किया।
पूर्व गिरफ्तारी और संदर्भ
बालेश्वर साहू पहले भी धोखाधड़ी और गबन के मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं। हालांकि, पिछले मामलों के बाद भी राजनीतिक दबाव और अंडरग्राउंड रहने की घटनाओं ने गिरफ्तारी प्रक्रिया को प्रभावित किया। इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
न्यायिक और प्रशासनिक पहल
जिला न्यायालय ने पुलिस की रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर गिरफ्तार करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आरोपी को बिना किसी पक्षपात के गिरफ्तार किया जाए और संबंधित चालान पेश किए जाएं। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और बाकी आरोपियों और संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इस मामले को लेकर स्थानीय राजनीति में हलचल मची हुई थी। भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों द्वारा लगातार गिरफ्तारी की मांग की जा रही थी। गिरफ्तारी के बाद प्रशासन और पुलिस ने जनता को आश्वस्त किया कि न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक दबाव और प्रभावशाली पद का दुरुपयोग करके भी धन का दुरुपयोग किया जा सकता है। प्रशासन और न्यायपालिका ने ऐसे मामलों में सख्ती बरतने का संदेश दिया है।




