
रायपुर। राजधानी रायपुर में अपराधियों के हौसले अब इस कदर बुलंद हो गए हैं कि वे अपने अपराधों का प्रचार-प्रसार सरेआम सोशल मीडिया पर करने लगे हैं। अपराधियों का अब टारगेट सिर्फ सड़कें नहीं, बल्कि Instagram जैसे प्लेटफॉर्म भी हो गए हैं, जहां ये कट्टा, तलवार, चाकू जैसे खतरनाक हथियारों के साथ वीडियो और रील्स बना रहे हैं। इन रील्स में आपराधिक गानों की धुन पर पोज़ देते हुए यह युवा न केवल कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि आम लोगों में खौफ का माहौल भी बना रहे हैं।
इनका मकसद साफ है—सोशल मीडिया पर अपनी ‘दहशत’ का ब्रांड बनाना और खुद को गैंगस्टर के तौर पर पेश करना। इनके इंस्टाग्राम बायो से लेकर रील्स तक, सबकुछ एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है, जिससे वे खुद को ‘भाई’, ‘गैंग का लीडर’, या ‘रायपुर का डॉन’ जैसा दिखाने की कोशिश करते हैं।
छोटे अपराधियों का बड़ा गैंग तैयार हो रहा
शहर के जिन इलाकों से ऐसे युवाओं की पहचान हो रही है, उनमें पुरानी बस्ती, गोलबाजार, डी.डी. नगर, टिकरापारा और तेलीबांधा प्रमुख हैं। इन इलाकों में 18 से 22 वर्ष की उम्र के लड़के, जिनमें से कई स्कूल या कॉलेज छोड़ चुके हैं, बेरोजगार हैं और सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में अपराध के रास्ते पर निकल पड़े हैं।
इन युवाओं में “भाई बनने” की एक अजीब प्रतिस्पर्धा चल रही है, और इनका मानना है कि हथियारों के साथ वीडियो बनाकर Instagram पर पोस्ट करना उन्हें लोकप्रिय बनाएगा। यह चलन इस कदर बढ़ गया है कि अब इनसे जुड़े अकाउंट्स पर हजारों फॉलोअर्स दिखाई देते हैं, जिससे अन्य युवाओं को भी ऐसे ही वीडियो बनाने के लिए प्रेरणा मिल रही है।
पुलिस की निगरानी पर सवालिया निशान
हालांकि रायपुर पुलिस ने समय-समय पर ऐसे वीडियो अपलोड करने वाले कुछ युवाओं को गिरफ्तार किया है, फिर भी सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं। इससे सवाल खड़े होते हैं कि क्या पुलिस और साइबर सेल की निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है? एक वरिष्ठ नागरिक ने टिप्पणी की, “आज जिन हथियारबंद रील्स को हम नादानी समझ रहे हैं, कल यही नादानी किसी बड़े अपराध में तब्दील हो सकती है। अगर समय रहते प्रशासन और पुलिस नहीं चेती, तो रायपुर को गैंगवॉर और माफिया संस्कृति की ओर बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।”
Instagram बना अपराधियों का मंच
जांच में यह भी सामने आया है कि बदमाश Instagram का इस्तेमाल न केवल प्रचार के लिए, बल्कि अपने गुट के सदस्यों से संपर्क बनाए रखने और धमकाने के लिए भी कर रहे हैं। वीडियो में अक्सर गैंग के नाम, इलाके और निजी दुश्मनों के खिलाफ चेतावनी भरे मैसेज भी देखने को मिलते हैं। यह पूरी रणनीति अपराध के ‘ब्रांडिंग मॉडल’ की तरह है, जिसमें इंटरनेट का प्रयोग डर फैलाने, रिक्रूटमेंट और प्रभाव बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई जरूरी
अब यह आवश्यक हो गया है कि रायपुर पुलिस और साइबर सेल एक संयुक्त अभियान चलाएं, जिसमें ऐसे सभी Instagram अकाउंट्स को चिह्नित कर उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए। इसके अलावा, जिन इलाकों में ये घटनाएं अधिक सामने आ रही हैं, वहां नियमित गश्त, चेकिंग और स्थानीय पुलिस की उपस्थिति बढ़ाई जानी चाहिए। राजधानी में अपराध के बदलते रूप को देखते हुए अब पुलिस को भी अपनी कार्यशैली और तकनीकी दक्षता को अपडेट करना होगा, ताकि अपराधियों के नए तौर-तरीकों का मुकाबला प्रभावी रूप से किया जा सके।
सुधारात्मक पहल की भी जरूरत
विशेषज्ञों की मानें तो इस समस्या का समाधान केवल गिरफ्तारी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि इन युवाओं को समय रहते सही दिशा दिखाई जाए। इसके लिए उन्हें काउंसलिंग, स्किल ट्रेनिंग और रोजगार के अवसर देने की जरूरत है। यदि शासन और प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कार्य करें, तो कई युवा अपराध के रास्ते पर जाने से बच सकते हैं। कई गैर-सरकारी संगठन और समुदाय भी इस दिशा में मदद कर सकते हैं।




