
रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित राजीव नगर की जीवन निकेतन सोसायटी से हाल ही में सामने आए एक सनसनीखेज वीडियो ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस वीडियो में मुख्तार हुसैन खान नामक व्यक्ति जो की फाफाडीह स्थित ओ जनरल ए सी कंपनी में कार्यरत है, जो इसी सोसायटी में रहता है, को आधी रात को अनुसूचित जनजाति समाज से संबंधित एक नाबालिग बच्ची को डरा-धमकाकर, हाथ पकड़कर जबरदस्ती अपने घर के अंदर खींचते हुए देखा गया है। वीडियो में यह भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि मुख्तार खान उस समय ऊपरी वस्त्रविहीन था, केवल लुंगी पहने हुए था और उसके हाथ में एक बड़ा डंडा था, जिससे वह बच्ची को डराने का प्रयास करता है। बच्ची डरी-सहमी हुई थी और भय के कारण घर से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मुख्तार खान ने बलपूर्वक उसे वापस अंदर खींच लिया और दरवाजा बंद कर लिया।
यह घटना न केवल मानवता को कलंकित करने वाली है, बल्कि अनुसूचित जनजाति समाज की अस्मिता, बाल अधिकारों और महिला सुरक्षा पर सीधा हमला है। इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि यह वही मुख्तार खान है जिसके घर का एक और वीडियो कुछ दिन पहले वायरल हुआ था, जिसे “बुरखा कांड” के नाम से जाना गया। उस वीडियो में मुख्तार की पत्नी उम्मीदा बानो को एक पुरुष को बुरखा पहनाकर अपने घर में लाते और फिर उसी को भारी वस्तु बुरखे में छिपाकर बाहर ले जाते हुए देखा गया था।
दोनों वीडियो यह प्रमाणित करते हैं कि मुख्तार खान का घर महज़ एक आवास नहीं, बल्कि संगठित आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। उस पर पूर्व में महिला के साथ छेड़छाड़, कब्जा, अश्लील हरकतें और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप पहले से ही लंबित हैं। अब एक नाबालिग बच्ची को धमकाकर घर में घसीट ले जाना एक ऐसा घिनौना अपराध है, जो किसी सभ्य समाज में कल्पना के बाहर होना चाहिए- लेकिन रायपुर में वह हो चुका है।
क्या किसी राजनीतिक संरक्षण के कारण मुख्तार खान को खुला छोड़ा गया है?
अनुसूचित जनजाति विभाग की यह संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि वह इस मामले में तुरंत स्वतः संज्ञान ले। यह सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक अनुसूचित जनजाति की नाबालिग बच्ची के खिलाफ बर्बरता है। विभाग को न केवल कड़े शब्दों में बयान देना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुख्तार खान के खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम,और BNSS की गंभीर धाराओं के अंतर्गत अपराध दर्ज कर उसे अविलंब गिरफ्तार किया जाए। बच्ची की सुरक्षा, पुनर्वास और न्यायिक संरक्षण सुनिश्चित करना विभाग का कर्तव्य है, जिसकी प्रतीक्षा आज भी की जा रही है। राज्य शासन और पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट या निर्णायक कार्रवाई न होना यह सिद्ध करता है कि कानून का भय समाप्त हो चुका है, और अपराधियों को राज्य में संरक्षण प्राप्त है।
प्रश्न सीधा है- क्या पुलिस प्रशासन और अनुसूचित जनजाति विभाग इस वीडियो को भी नजरअंदाज़ करेंगे, या अब वाकई कोई ठोस कार्रवाई होगी?
“बुरखा कांड” में बड़ा खुलासा
रायपुर के राजीव नगर स्थित जीवन निकेतन सोसायटी के निवासी मुख्तार हुसैन खान (जो की फाफाडीह स्थित ओ जनरल ए सी कंपनी में कार्यरत है) के फ्लैट नंबर 308 से सामने आए “बुरखा कांड” ने छत्तीसगढ़ की राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में जहां वायरल वीडियो ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, वहीं पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी और अब तक किसी भी प्रकार का खुलासा न हो पाना प्रशासन की गंभीर लापरवाही का प्रतीक बन चुका है।
वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा गया कि एक महिला पहले खाली बैग और बुरखा लेकर घर से निकलती है, फिर थोड़ी देर बाद उसी बुरखे को एक पुरुष को पहना कर अपने घर – यानी फ्लैट नंबर 308 – में वापस लाती है। वही पुरुष कुछ समय पश्चात जब घर से बाहर निकलता है, तो बुरखे के भीतर कुछ अत्यंत भारी वस्तु छिपाकर ले जाते हुए देखा गया है।
वास्तविकता इतनी स्पष्ट है कि वीडियो में बुरखा पहने व्यक्ति को चलते हुए असहजता हो रही है, उसका शरीर झुका हुआ दिख रहा है और बुरखे की चाल में स्पष्ट लड़खड़ाहट कैमरे में दर्ज है — जो इस ओर इशारा करता है कि बुरखे के भीतर छुपाई गई वस्तु हल्की नहीं, बल्कि अत्यंत वजनी थी।




